जैसलमेर, 14 अक्टूबर
राजस्थान के जैसलमेर जिले में मंगलवार दोपहर एक निजी एसी स्लीपर बस में शॉर्ट सर्किट से लगी भीषण आग ने 20 लोगों की जान ले ली। हादसा जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर हुआ। बस में सवार 57 यात्रियों में से तीन दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिनका इलाज जोधपुर और जैसलमेर के अस्पतालों में चल रहा है। मृतकों में दो बच्चे और चार महिलाएं भी शामिल हैं।
भयावह मंजर, पहचान मुश्किल
हादसे के बाद घटनास्थल का नज़ारा बेहद भयावह था। कई शव इतनी बुरी तरह जल चुके थे कि उनकी पहचान करना असंभव हो गया। अब प्रशासन ने डीएनए जांच के जरिए मृतकों की पहचान शुरू कर दी है। कलेक्टर प्रताप सिंह ने बताया कि अब तक आठ मृतकों की पहचान हो पाई है, जिनमें जोधपुर निवासी महेंद्र मेघवाल, उनकी पत्नी और चार बच्चे शामिल हैं। अन्य शवों की पहचान के लिए परिजनों से डीएनए सैंपल देने की अपील की गई है।
पटाखों से बढ़ी तबाही
जांच में सामने आया है कि बस के पिछले हिस्से में पटाखे ले जाए जा रहे थे। शॉर्ट सर्किट से निकली चिंगारी जब पटाखों तक पहुंची तो आग ने पलभर में विकराल रूप ले लिया। बस जब तक रुकी, तब तक आग पूरी तरह फैल चुकी थी। चालक ने अपनी जान बचाने के लिए बस रोककर कूदकर जान बचाई। ग्रामीणों ने पानी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन असफल रहे।
सेना और ग्रामीणों ने बचाई कई जानें
थईयात गांव के पास हुए इस हादसे में सेना के जवान तुरंत मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के साथ मिलकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। चश्मदीद कस्तूर सिंह के अनुसार, आग लगने के बाद बस का दरवाज़ा लॉक हो गया था। सेना ने जेसीबी मशीन की मदद से दरवाज़ा तोड़कर घायलों और शवों को बाहर निकाला।
राज्य और केंद्र सरकार की संवेदनाएं
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत देर शाम विशेष विमान से जैसलमेर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल और अस्पतालों का दौरा कर घायलों के उपचार की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई और प्रशासन को हर संभव सहायता देने के निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस भीषण दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “इस कठिन समय में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। ईश्वर घायलों को शीघ्र स्वस्थ करें।” प्रधानमंत्री राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।
एक दर्दनाक सबक
जैसलमेर की यह त्रासदी पूरे देश के लिए चेतावनी बन गई है कि सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा नियमों की अनदेखी कितनी बड़ी कीमत वसूल सकती है। एक पल की लापरवाही ने 20 जिंदगियां निगल लीं—एक ऐसा घाव जो राजस्थान की रेत में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है।
