बिजनेस डेस्क
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड डील (व्यापार समझौता) अब अपने फाइनल स्टेज में पहुंच गई है। दोनों देशों के बीच अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और समझौते की भाषा पर अंतिम रूप देने का काम तेजी से जारी है। इस डील का लक्ष्य है कि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए।
समझौता अंतिम चरण में, अधिकांश मुद्दों पर बनी सहमति
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच वार्ता का पांचवां दौर पूरा हो चुका है। दोनों पक्षों ने इस बात की पुष्टि की है कि अब कोई बड़ा मतभेद नहीं बचा है और बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
गुरुवार को हुई वर्चुअल बैठक में दोनों देशों के वार्ताकारों ने डेडलाइन तय करने पर भी चर्चा की, जिससे संकेत मिल रहा है कि इस डील पर 2025 की शुरुआत में हस्ताक्षर हो सकते हैं।
2030 तक $500 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
वर्तमान में भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 191 अरब डॉलर का है। इस डील के जरिए दोनों देशों ने 2030 तक इसे 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है।
यह कदम न केवल दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि टेक्नोलॉजी, डिफेंस और एनर्जी जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश और रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा।
डेयरी सेक्टर पर अमेरिका की मांग से भारत सतर्क
हालांकि, इस बातचीत में एक मुद्दा अब भी चर्चा में है — अमेरिका की डेयरी और कृषि क्षेत्र में प्रवेश की मांग।
भारत ने इस पर चिंता जताई है, क्योंकि ये सेक्टर देश में रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अहम हैं।
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि डेयरी इंडस्ट्री में किसी विदेशी दखल की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ट्रेड रिलेशंस का नया अध्याय
पिछले कुछ वर्षों में, भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला था — खासकर तब जब अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाया था। लेकिन अब दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और टैरिफ बाधाओं को घटाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
यह ट्रेड डील न केवल भारत-अमेरिका संबंधों को नई गति देगी, बल्कि आने वाले दशक में वैश्विक व्यापार परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव ला सकती है।
