25 से 31 मार्च तक राजधानी में फिल्मों, कलाकारों और संस्कृतियों का होगा महाकुंभ, 140 चुनिंदा फिल्में होंगी स्क्रीन
नई दिल्ली, 24 मार्च
देश की राजधानी दिल्ली अब सिर्फ सियासत का ही नहीं, बल्कि सिनेमा और संस्कृति का भी बड़ा केंद्र बनने जा रही है। पहली बार दिल्ली में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का आयोजन होने जा रहा है, जो 25 से 31 मार्च 2026 तक भारत मंडपम में आयोजित होगा। इस आयोजन को दिल्ली सरकार के पर्यटन विभाग की पहल माना जा रहा है।
इस फिल्म फेस्टिवल को लेकर दावा है कि यह सिर्फ फिल्मों की स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दिल्ली को वैश्विक सांस्कृतिक नक्शे पर मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा के मुताबिक, राजधानी में पहली बार इतने बड़े स्तर पर यह आयोजन किया जा रहा है।
फेस्टिवल को लेकर सबसे दिलचस्प बात यह है कि दुनिया भर से 2000 से ज्यादा एंट्री मिली हैं, जिनमें से करीब 140 फिल्मों का चयन किया गया है। यानी दर्शकों को एक ही मंच पर अलग-अलग देशों, भाषाओं और संस्कृतियों की कहानियां देखने का मौका मिलेगा।
इस खास आयोजन में सिर्फ अंतरराष्ट्रीय फिल्में ही नहीं, बल्कि भारत के अलग-अलग हिस्सों की क्षेत्रीय फिल्मों को भी जगह दी जाएगी। तमिल, तेलुगु, मराठी, भोजपुरी, पंजाबी, हरियाणवी, बंगाली और नॉर्थ-ईस्ट सिनेमा की चुनिंदा फिल्मों की स्क्रीनिंग होगी। साथ ही बॉलीवुड की चर्चित फिल्मों का भी प्रदर्शन किया जाएगा।
दिल्ली सरकार इस फेस्टिवल को हर साल आयोजित करने की योजना पर काम कर रही है। मकसद साफ है—दिल्ली को एक ऐसे फिल्म और सांस्कृतिक हब के रूप में स्थापित करना, जहां भविष्य में शूटिंग, फिल्म निर्माण और लाइव एंटरटेनमेंट की संभावनाएं और मजबूत हों। इसके साथ ही भारत मंडपम, यशोभूमि और कर्तव्यपथ जैसे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को भी दुनिया के सामने पेश करने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर, दिल्ली का यह पहला इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल सिर्फ एक इवेंट नहीं, बल्कि राजधानी की सांस्कृतिक पहचान को नए आयाम देने वाला मंच बन सकता है। सिनेमा प्रेमियों के लिए यह हफ्ता किसी जश्न से कम नहीं रहने वाला।
