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कुछ नहीं कर सका अमेरिका, होर्मुज से टैंकर ले आया चीन

-अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे चीनी तेल टैंकर
– वैश्विक ऊर्जा राजनीति में नया संकेत

– चीन के पास  1.3 अरब बैरल का स्ट्रैटेजिक क्रूड ऑयल रिजर्व

 

नई दिल्ली:
अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और निगरानी के बावजूद चीन से जुड़े तेल टैंकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य से लगातार गुजर रहे हैं। हालिया डेटा के अनुसार, इन टैंकरों की आवाजाही यह दर्शाती है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर अमेरिकी नियंत्रण पूरी तरह प्रभावी नहीं रह गया है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जो विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, वहां से गुजरने वाले टैंकरों पर अमेरिका की कड़ी नजर रहती है। इसके बावजूद चीन से जुड़े जहाजों का इस रास्ते से गुजरना यह संकेत देता है कि बीजिंग अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बेहद आक्रामक रणनीति अपना रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ने पहले से ही ऐसी स्थिति के लिए तैयारी कर रखी है।

🔹 1.3 अरब बैरल का स्ट्रैटेजिक क्रूड रिजर्व

चीन पिछले कुछ वर्षों से भारी मात्रा में तेल का भंडारण कर रहा है। उसके पास करीब 1.3 अरब बैरल का स्ट्रैटेजिक क्रूड ऑयल रिजर्व मौजूद है, जो कई महीनों तक उसकी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है।

इसके साथ ही चीन भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ग्रीन एनर्जी की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। सोलर, विंड और हाइड्रोपावर जैसी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमताओं का बड़े स्तर पर विस्तार किया जा रहा है।

वहीं, भारत ने भी इस दिशा में प्रयास शुरू किए हैं, लेकिन गति के मामले में वह अभी चीन से पीछे है। ऊर्जा क्षेत्र में यह अंतर भविष्य में गैस और तेल संकट के रूप में सामने आ सकता है।


 वैश्विक संकेत

विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटनाक्रम केवल टैंकरों की आवाजाही तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन और ऊर्जा राजनीति में हो रहे बदलाव का संकेत भी है। चीन की रणनीति साफ है—ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करते हुए वह किसी भी संभावित संकट के लिए खुद को तैयार कर रहा है।

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