Site icon Hamesha Sakriya

H-1B Visa Jobs 2024: भारतीय कंपनियां अमेरिकी फर्म्स के मुकाबले क्यों देती हैं कम वेतन?

अमेरिका में H-1B वीज़ा की लॉटरी 2024 में जिन आवेदकों को मंज़ूरी मिली, उनमें से 80% लेवल 1 और लेवल 2 कैटेगरी के कर्मचारी थे। ये वही कर्मचारी हैं जिन्हें या तो एंट्री-लेवल सैलरी मिलती है या फिर मध्यम स्तर का वेतन


 लेवल वाइज H-1B वीज़ा मंज़ूरी

इससे साफ है कि भारतीय आईटी और टेक कंपनियां ज़्यादातर लेवल 2 कर्मचारियों पर निर्भर रहीं और उन्हें ऐसा वेतन दिया जो मीडियन सैलरी (औसत वेतन) से कम था।


इन भारतीयों का दबदबा


 ट्रंप सरकार का बड़ा कदम


 क्यों ज़रूरी है H-1B?

H-1B वीज़ा अमेरिकी कंपनियों को मौका देता है कि वे दुनिया भर से कुशल वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, शिक्षकों और आईटी प्रोफेशनल्स को नियुक्त कर सकें। यह कार्यक्रम अमेरिकी बिज़नेस स्किल गैप को भरने के लिए अहम माना जाता है।

सारांश
2024 में H-1B वीजा लॉटरी में स्वीकृत 80% आवेदन एंट्री-लेवल और मिड-लेवल कर्मचारियों के थे, जिनमें भारतीय आईटी कंपनियों का दबदबा रहायह अमेरिकी कंपनियों को कुशल श्रमिकों की भर्ती करने की अनुमति देता है, लेकिन 2024 में ट्रंप ने H-1B आवेदन फीस को बढ़ाकर $100,000 कर दिया, जिसका उद्देश्य अमेरिकी नौकरियों की रक्षा करना और उच्च-वेतन वाले कुशल कर्मचारियों को प्राथमिकता देना था. H-1B वीजा अमेरिका में काम करने वाले विदेशी पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें भारतीय पेशेवर बड़ी संख्या में शामिल हैं, लेकिन नए नियमों से जूनियर लेवल के कर्मचारियों को वीज़ा मिलने में मुश्किलें बढ़ गई हैं.

 

Exit mobile version