मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक नया खुलासा सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। अमेरिका के एक प्रमुख विशेषज्ञ ने दावा किया है कि पाकिस्तान ने कभी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी।
600 से 900 सेंट्रीफ्यूज देने का दावा
अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के प्रोफेसर रॉबर्ट पेप के मुताबिक पाकिस्तान ने 1990 के दशक से लेकर 2000 की शुरुआत तक ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े 600 से 900 यूरेनियम सेंट्रीफ्यूज दिए थे।
सेंट्रीफ्यूज ऐसे उपकरण होते हैं जिनकी मदद से यूरेनियम को समृद्ध (एनरिच) किया जाता है। यही प्रक्रिया आगे चलकर परमाणु ऊर्जा या परमाणु हथियार बनाने की क्षमता देती है।
ईरान ने तकनीक को समझकर खुद बनाना शुरू किया
रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने सिर्फ इन मशीनों का इस्तेमाल ही नहीं किया, बल्कि उन्हें खोलकर उनकी तकनीक को समझा और फिर अपने सेंट्रीफ्यूज बनाना शुरू कर दिया। इससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिली।
पुराना लेकिन संवेदनशील मुद्दा
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर खान के नेटवर्क पर पहले भी आरोप लग चुके हैं कि उन्होंने कई देशों को परमाणु तकनीक से जुड़ी जानकारी दी थी।
क्यों बढ़ गई दुनिया की चिंता?
यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका व उसके सहयोगी देश पहले से ही चिंतित हैं। विश्लेषकों का मानना है कि अगर ऐसे आरोप सही साबित होते हैं तो क्षेत्र में परमाणु हथियारों की दौड़ और तेज हो सकती है।
