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तमिलनाडु में BJP का खाता खुलना टेढ़ी खीर

गौरव शुक्ला की नज़र से

तमिलनाडु की सियासत एक बार फिर उबाल पर है—लेकिन इस बार मुकाबला सिर्फ दो दलों के बीच नहीं, बल्कि तीन बड़े मोर्चों की टक्कर में बदल चुका है।

एक तरफ सत्ता में बैठी M. K. Stalin की DMK, दूसरी ओर AIADMK और BJP का गठबंधन, और तीसरी तरफ एंट्री मार चुके फिल्म स्टार Vijay—यानी मुकाबला अब और भी दिलचस्प हो गया है। लेकिन मौजूदा जमीनी हकीकत को देखते हुए लगता है कि पीएम मोदी एंड टीम के लिए तमिलनाडु में BJP का खाता खुलना मुश्किल लग रहा है, वही 125-145 सीटों के साथ स्टालिन की वापसी के आसार नजर  आर रहे है जबकि  थलापति विजय को 6 से 14 सीटें मिलनी की आशा है। 

गठबंधन की राजनीति: जीत की असली कुंजी

तमिलनाडु में चुनाव सिर्फ पार्टियां नहीं लड़तीं… यहां गठबंधन ही खेल बनाते और बिगाड़ते हैं। इस बार AIADMK ने BJP, PMK और अन्य दलों के साथ हाथ मिलाकर मजबूत फ्रंट तैयार किया है, जिससे मुकाबला और कड़ा हो गया है।

वहीं DMK अपने पारंपरिक वोट बैंक और कल्याणकारी योजनाओं के भरोसे मैदान में है, और दावा कर रही है कि उसकी पकड़ अभी भी मजबूत है।

‘विजय’ की एंट्री: गेम चेंजर या वोट कटर?

सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या विजय की पार्टी TVK इस चुनाव का गेम बदल देगी?
विजय ने बिना किसी बड़े गठबंधन के मैदान में उतरकर बड़ा दांव खेला है। लेकिन तमिलनाडु की राजनीति का इतिहास कहता है—यहां अकेले लड़ना जोखिम भरा होता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि TVK भले सरकार न बना पाए, लेकिन वह वोट शेयर जरूर काट सकती है, जिससे सीधा असर DMK और AIADMK दोनों पर पड़ सकता है।

तीन-तरफा मुकाबला, बढ़ी सियासी गर्मी

23 अप्रैल को होने वाले इस चुनाव में 234 सीटों पर फैसला होगा और 4 मई को नतीजे आएंगे।

इस बार चुनाव सिर्फ सत्ता का नहीं… बल्कि

नजर किस पर?

तमिलनाडु का चुनाव इस बार सिर्फ चुनाव नहीं…
एक हाई-वोल्टेज पॉलिटिकल थ्रिलर बन चुका है।

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