मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और तेज होता दिख रहा है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान में कई बड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “लंबे समय से जिन टार्गेट्स की तलाश थी, उन्हें हमारी महान सेना ने खत्म कर दिया।” हालांकि उन्होंने इन ठिकानों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी।
ईरान में कई ठिकाने तबाह होने का दावा
ट्रंप के मुताबिक अमेरिकी सेना ने हालिया हमलों में ईरान के कई अहम सैन्य ठिकानों को ध्वस्त कर दिया है। यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर लगातार हमले किए जा रहे हैं और संघर्ष अपने पांचवें हफ्ते में पहुंच चुका है। रिपोर्टों के मुताबिक इन हमलों में ईरान के मिसाइल लॉन्च साइट्स और सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी नुकसान पहुंचा है, हालांकि ईरान अभी भी जवाबी हमले कर रहा है।
अब ट्रंप की नई ‘खतरनाक’ योजना
इसी बीच एक और बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप प्रशासन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के लिए एक बेहद जोखिम भरे सैन्य ऑपरेशन पर विचार कर रहा है। इस योजना के तहत अमेरिकी सेना ईरान की जमीन के अंदर छिपाकर रखे गए समृद्ध यूरेनियम को जब्त करने के लिए ग्राउंड ऑपरेशन कर सकती है।
बताया जा रहा है कि करीब 1000 पाउंड समृद्ध यूरेनियम ईरान के इस्फहान और नतांज जैसे परमाणु ठिकानों के आसपास भूमिगत जगहों पर छिपाकर रखा गया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि अगर यह यूरेनियम ईरान के पास रहा तो वह भविष्य में परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
जमीन पर उतर सकती है अमेरिकी सेना
सूत्रों के अनुसार इस ऑपरेशन में अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज, इंजीनियर और परमाणु सामग्री संभालने वाले विशेषज्ञ शामिल हो सकते हैं। यह मिशन कई दिनों तक चल सकता है और इसमें सैनिकों को ईरान के अंदर रहकर रेडियोधर्मी सामग्री को सुरक्षित निकालना पड़ेगा। यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे बेहद जोखिम भरा कदम मान रहे हैं।
बढ़ सकता है युद्ध का दायरा
अगर अमेरिका ऐसा कदम उठाता है तो मध्य-पूर्व में चल रहा संघर्ष और व्यापक हो सकता है। पहले से ही ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच हमले-प्रतिहमले जारी हैं, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता और वैश्विक तेल बाजार पर असर पड़ रहा है।
कुल मिलाकर, ट्रंप के नए दावे और संभावित सैन्य योजना ने मध्य-पूर्व की स्थिति को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका वास्तव में ईरान के अंदर इतना बड़ा और जोखिम भरा सैन्य ऑपरेशन करने का फैसला करेगा।
