पाकिस्तान को बड़ा झटका — शेल, फाइज़र के बाद अब P&G ने कहा “टाटा”

इस्लामाबाद: पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था को एक और बड़ा झटका लगा है। बहुराष्ट्रीय कंपनी प्रॉक्टर एंड गैंबल (P&G) ने देश में अपना मैन्युफैक्चरिंग और बिज़नेस ऑपरेशंस बंद करने का ऐलान कर दिया है।
यह वही कंपनी है जो टाइड, पैम्पर्स, हेड एंड शोल्डर्स, सेफगार्ड और पैंटीन जैसे मशहूर ब्रांड बनाती है।

कंपनी ने कहा है कि वह अब पाकिस्तान में थर्ड-पार्टी डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल अपनाएगी — यानी उसके उत्पाद स्थानीय वितरकों के ज़रिए बेचे जाएंगे।
इस फैसले से पहले, दो अन्य दिग्गज कंपनियाँ — शेल और फाइज़र — भी पाकिस्तान से अपना कारोबार समेट चुकी हैं।


क्या कहा कंपनी ने

P&G ने बताया कि वैश्विक पुनर्गठन कार्यक्रम के तहत उसने पाकिस्तान में कारोबार बंद करने का निर्णय लिया है।
कंपनी अपने कर्मचारियों को दो विकल्प दे रही है — या तो उन्हें विदेशी नियुक्ति दी जाएगी या फिर सेपरेशन पैकेज

इसके साथ ही P&G की सहायक कंपनी गिलेट पाकिस्तान ने भी घोषणा की है कि वह अपने बोर्ड स्तर पर डिलिस्टिंग (शेयर मार्केट से बाहर निकलने) पर विचार करेगी।


बिज़नेस में गिरावट और कारण

पाकिस्तान में लगातार बढ़ती महंगाई, ऊँचे आयात शुल्क, बिजली की ऊँची दरें और मुनाफे पर पाबंदी (Profit Repatriation Ban) जैसी आर्थिक नीतियों ने विदेशी कंपनियों के लिए व्यापार करना मुश्किल बना दिया है।

P&G का कहना है कि पाकिस्तान में कम होती मांग और नीतिगत अस्थिरता के चलते अब प्रत्यक्ष संचालन व्यावहारिक नहीं रहा।
दूसरी तरफ, पिछले वित्तीय वर्ष में गिलेट पाकिस्तान का रेवेन्यू लगभग आधा घट गया, जिससे कंपनी को नुकसान झेलना पड़ा।


P&G का पाकिस्तान में सफर

  • P&G ने 1991 में पाकिस्तान में कदम रखा था।

  • 1994 में साबुन निर्माण इकाई और 2010 में डिटर्जेंट प्लांट खरीदा।

  • लगभग तीन दशक तक यह देश की प्रमुख कंज़्यूमर गुड्स कंपनियों में शामिल रही।

  • लेकिन अब कंपनी मानती है कि थर्ड-पार्टी डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल ही सबसे बेहतर रास्ता है ताकि उपभोक्ताओं को उत्पाद मिलते रहें।


उद्योग जगत की प्रतिक्रिया

व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम विदेशी निवेशकों के लिए “रेड सिग्नल” है।
पूर्व गिलेट पाकिस्तान CEO ने कहा कि बिजली दरों, रेगुलेटरी दबाव और कमज़ोर इन्फ्रास्ट्रक्चर ने कंपनियों का भरोसा तोड़ दिया है।
उनका मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो और भी मल्टीनेशनल कंपनियाँ पाकिस्तान से बाहर जा सकती हैं।

 

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