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भारत ने अपने कच्चे तेल की निर्भरता को 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक किया: हरदीप सिंह पुरी

वैश्विक अस्थिरता और तेल बाजार में उठापटक के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब देश सिर्फ एक या दो क्षेत्रों पर निर्भर रहने के बजाय कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में विविधता (diversification) ला रहा है—ताकि किसी एक संकट का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर न पड़े।


 कई देशों से तेल खरीदने की रणनीति

रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से कच्चा तेल मंगा रहा है।

इसका मकसद साफ है—ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और सप्लाई बाधित होने के जोखिम को कम करना।


 क्यों जरूरी हुआ यह कदम?

हाल के समय में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम मार्गों पर असर ने तेल सप्लाई को प्रभावित किया है।

ऐसे हालात में भारत ने समय रहते अपनी रणनीति बदल दी।


क्या है इसका फायदा?

भारत जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देश के लिए यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है।


 आयात पर अभी भी निर्भरता

हालांकि, भारत अभी भी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।

यही वजह है कि सरकार अब स्रोतों को फैलाकर जोखिम कम करने की दिशा में काम कर रही है।


 निष्कर्ष

भारत अब ‘एक स्रोत पर निर्भरता’ से निकलकर ‘मल्टी-सोर्स रणनीति’ की ओर बढ़ चुका है।

आसान शब्दों में कहें तो—
“तेल की राजनीति के इस दौर में भारत ने समझदारी दिखाते हुए अपने विकल्प बढ़ा लिए हैं, ताकि देश की ऊर्जा जरूरतें हर हाल में पूरी होती रहें।”

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