नई दिल्ली: भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों को और मजबूत करते हुए बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने रूस और अमेरिकी कंपनी बोइंग के साथ कुल 858 करोड़ रुपये के दो महत्वपूर्ण समझौते किए हैं, जो देश की हवाई और समुद्री सुरक्षा क्षमता को नई ताकत देंगे।
आसमान में बढ़ेगी ताकत: रूस से टुंगुस्का मिसाइल सिस्टम
इस डील का बड़ा हिस्सा रूस के साथ हुआ है, जिसके तहत भारतीय सेना के लिए टुंगुस्का एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम खरीदा जाएगा। करीब 445 करोड़ रुपये की इस डील से भारत की मल्टी-लेयर एयर डिफेंस प्रणाली और मजबूत होगी।
यह आधुनिक सिस्टम:
- ड्रोन, हेलीकॉप्टर और क्रूज मिसाइल जैसे खतरों को रोकने में सक्षम है
- युद्ध के मैदान में तेज़ और सटीक प्रतिक्रिया देता है
- भारत की सीमाओं की सुरक्षा को और मजबूत करेगा
साथ ही, यह सौदा भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक रक्षा संबंधों को भी और मजबूती देता है।
समुद्र में भी मजबूती: बोइंग के साथ समझौता
दूसरा बड़ा समझौता अमेरिकी कंपनी बोइंग की भारतीय इकाई के साथ हुआ है, जिसके तहत भारतीय नौसेना के P-8I समुद्री निगरानी विमानों की मेंटेनेंस और निरीक्षण किया जाएगा।
करीब 413 करोड़ रुपये की यह डील:
- नौसेना के विमानों की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाएगी
- समुद्री निगरानी और सुरक्षा को और मजबूत करेगी
- देश के भीतर ही MRO (Maintenance, Repair, Overhaul) सुविधा को बढ़ावा देगी
आत्मनिर्भर भारत को भी मिला बल
इस पूरे समझौते की खास बात यह है कि इसमें ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर भी जोर दिया गया है।
- P-8I विमान की मेंटेनेंस भारत में ही होगी
- घरेलू रक्षा क्षमताओं को बढ़ावा मिलेगा
- विदेशी तकनीक के साथ स्वदेशी क्षमता का संतुलन बनेगा
क्यों है यह डील खास?
यह सिर्फ एक रक्षा खरीद नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम है—
- भारत की डुअल फोकस रणनीति (Air + Maritime Security) को मजबूत करता है
- आधुनिक युद्ध की चुनौतियों के लिए तैयारी को तेज करता है
- वैश्विक रक्षा साझेदारियों को संतुलित करता है
