भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में मंगलवार को ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला, जिसने राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रही सियासी हलचल को चरम पर पहुंचा दिया। कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होते ही पूरा राजनीतिक समीकरण बदल गया। इतना ही नहीं, बेंगलुरु रवाना होने के लिए रनवे पर पहुंच चुका कांग्रेस विधायकों का विमान भी वापस लौट आया।
भाजपा की आपत्ति पर रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया। भाजपा का आरोप था कि उन्होंने हैदराबाद की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी। जवाब मांगने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने कांग्रेस प्रत्याशी का पक्ष असंतोषजनक मानते हुए नामांकन खारिज कर दिया।
नामांकन रद्द होने की खबर मिलते ही कांग्रेस खेमे में हड़कंप मच गया। पार्टी ने इस फैसले को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाने का ऐलान किया। दिल्ली में कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन आयोग के बाहर धरना दिया, जबकि भोपाल में भी विरोध के स्वर तेज हो गए।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे नाटकीय पहलू कांग्रेस विधायकों की बाड़ाबंदी से जुड़ा रहा। पार्टी ने अपने विधायकों को बेंगलुरु भेजने के लिए चार्टर्ड विमान की व्यवस्था की थी। दोपहर से ही एयरपोर्ट पर राजनीतिक हलचल तेज थी। उड़ान को लेकर अनुमति विवाद, नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप और घंटों की मशक्कत के बाद आखिरकार विमान को उड़ान की मंजूरी मिल गई।
शाम करीब साढ़े छह बजे विमान का इंजन स्टार्ट हुआ और 38 विधायकों समेत 75 लोग रवाना होने की तैयारी में थे। लेकिन तभी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने की खबर आई। देखते ही देखते सियासी समीकरण बदल गए और उड़ान भरने को तैयार विमान रनवे से ही वापस लौट आया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अब राज्यसभा की तीनों सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय माना जा रहा है। वहीं कांग्रेस इस मामले को अदालत और निर्वाचन आयोग तक ले जाकर राजनीतिक और कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी में है।
मध्य प्रदेश की राजनीति में यह घटनाक्रम सिर्फ एक नामांकन खारिज होने की कहानी नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति, सियासी अविश्वास और सत्ता-संघर्ष का नया अध्याय बन गया है।

