मध्य-पूर्व में ईरान और इजराइल के बीच जारी जंग के बीच पीएम मोदी ने शनिवार को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर ईरान जंग को लेकर बात की।
दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि होर्मुज स्ट्रेट जैसे समुद्री रास्ते खुले और सुरक्षित रहने चाहिए और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित नहीं होना चाहिए। पीएम मोदी ने ऊर्जा ठिकानों पर हो रहे हमलों की निंदा की। वहीं, ईरान जंग के बीच तुर्किये, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्री 30 मार्च को पाकिस्तान पहुंचेंगे। यहां वे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी मुलाकात करेंगे। इस्लामाबाद में होने वाली इस बैठक में मिडिल ईस्ट के हालात पर चर्चा होगी। युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बड़ी बैठक मानी जा रही है, जिसमें कई देशों के विदेश मंत्री एक साथ शामिल होंगे।
मीटिंग के लिए पाकिस्तान ही क्यों?
पाकिस्तान के ईरान और सऊदी अरब दोनों से बेहतर रिश्ते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसलिए पाकिस्तान को विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए बेहतर जगह माना जा रहा है। यह मीटिंग पहले तुर्किये में होनी थी, लेकिन बाद में इसे पाकिस्तान शिफ्ट कर दिया गया।
- पाकिस्तान इस समय किसी एक पक्ष में सीधे शामिल नहीं है, इसलिए उसे न्यूट्रल जगह माना जा रहा है।
- उसके ईरान और सऊदी अरब दोनों से अच्छे रिश्ते हैं, इसलिए बातचीत आसान है।
- तुर्किये और मिस्र जैसे देशों के साथ भी पाकिस्तान के संबंध ठीक हैं।
ईरान के यूरेनियम प्लांट पर हमले के बाद बढ़ा तनाव, इजराइल को दी कड़ी चेतावनी
मध्य-पूर्व में ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। रिपोर्टों के मुताबिक इजराइल ने ईरान से जुड़े परमाणु और रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए हैं, जिसके बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसे हमले जारी रहे तो इजराइल को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
यूरेनियम और परमाणु ठिकानों पर हमला
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इजराइल ने ईरान के कुछ परमाणु और औद्योगिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। इनमें भारी पानी से जुड़े परमाणु संयंत्र और यूरेनियम उत्पादन से संबंधित सुविधाएं भी शामिल बताई जा रही हैं। हालांकि इजराइल ने हर हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन उसने ईरान के कुछ परमाणु ठिकानों पर कार्रवाई करने की बात स्वीकार की है।
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
हमलों के बाद ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इजराइल और उसके सहयोगियों को इस कार्रवाई के गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
