ईरानी सेना से डोनाल्ड ट्रंप की अपील: हथियार डालो, वरना मौत का सामना करो

वॉशिंगटन: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सुरक्षा बलों—ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड, सेना और पुलिस—से हथियार डालने और ईरानी जनता के साथ खड़े होने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वे ऐसा नहीं करते तो उन्हें “निश्चित मौत” का सामना करना पड़ सकता है।

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अब समय आ गया है कि ईरान के सुरक्षा बल देश के लोगों के साथ खड़े होकर “अपने देश को वापस लेने” में मदद करें। उन्होंने कहा कि इतने वर्षों के बाद उनके पास अपने देश को बदलने का अवसर है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि जो सुरक्षा बल हथियार डाल देंगे, उन्हें “इम्युनिटी” यानी कानूनी छूट दी जाएगी और उन्हें इतिहास के सही पक्ष में खड़े होने का मौका मिलेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जो लोग इस अपील को स्वीकार करेंगे वे पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।

अपने बयान में ट्रंप ने दुनिया भर में तैनात ईरानी राजनयिकों से भी अपील की कि वे शरण मांगें और एक नए तथा बेहतर ईरान के निर्माण में सहयोग करें। उनका कहना था कि ईरान एक ऐसा देश है जिसमें अपार संभावनाएं हैं और उसका भविष्य कहीं अधिक बेहतर हो सकता है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में जो भी ईरान का नेतृत्व करे, वह देश अमेरिका, उसके पड़ोसियों, इज़राइल या किसी अन्य देश के लिए खतरा न बने।

गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और पश्चिम एशिया की राजनीति को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव बना रहता है। ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल (2017–2021) के दौरान अमेरिका ने 2018 में ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) से अलग होकर ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे।

इसके अलावा 2020 में अमेरिका द्वारा ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के वरिष्ठ कमांडर कासिम सुलेमानी को निशाना बनाकर किए गए हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया था।

हाल के वर्षों में ईरान के अंदर राजनीतिक असंतोष, आर्थिक दबाव और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति पर नजर बनी हुई है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान की आंतरिक और बाहरी स्थिति को लेकर चर्चा तेज है।

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