हिमाचल प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी हब का उद्घाटन, ग्रामीण उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा

पालमपुर, 2 अप्रैल 2026:
ग्रामीण उद्यमिता को मजबूत करने और खाद्य प्रसंस्करण क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश के ग्राम पंचायत बड़सर में खाद्य प्रसंस्करण हेतु एक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी हब का उद्घाटन किया गया। यह पहल ग्रामीण समुदायों को तकनीक, प्रशिक्षण और अवसंरचना उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

यह हब National Institute of Food Technology Entrepreneurship and Management (निफ्टेम), कुंडली द्वारा CSK Himachal Pradesh Krishi Vishvavidyalaya, पालमपुर के सहयोग से स्थापित किया गया है। परियोजना को Department of Science and Technology के SEED (Science for Equity, Empowerment and Development) प्रभाग के अंतर्गत समर्थन प्राप्त है।

इस अवसर पर निफ्टेम के निदेशक Harinder Singh Oberoi ने खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की अध्यक्ष और परियोजना की प्रमुख अन्वेषक Rajni Chopra को हब की स्थापना के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि निफ्टेम में विकसित नवाचारों को ग्रामीण समुदायों तक पहुँचाना अत्यंत आवश्यक है, जिससे खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा मिल सके। उनके अनुसार यह हब हिमाचल प्रदेश में तकनीक और नवाचार के जमीनी स्तर तक हस्तांतरण का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

यह पहल मुख्य रूप से अलसी (फ्लैक्ससीड) के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य कम लागत वाले पौष्टिक खाद्य उत्पाद विकसित करना और स्थानीय समुदायों के लिए सतत आजीविका के अवसर बढ़ाना है। विशेष रूप से कांगड़ा जिले के बरासर गाँव के जनजातीय समुदाय आधारित स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को इससे लाभ मिलने की उम्मीद है।

हब का औपचारिक उद्घाटन सीएसकेएचपीकेवी के कार्यवाहक कुलपति A. K. Panda ने किया। इस अवसर पर कॉलेज ऑफ कम्युनिटी साइंस की डीन Chandrakanta Vats, खाद्य विज्ञान, पोषण एवं प्रौद्योगिकी विभाग की अध्यक्ष Anupama Sandal, स्थानीय जनप्रतिनिधि और स्वयं सहायता समूहों के सदस्य भी मौजूद रहे।

विशेषज्ञों के अनुसार यह हब किसानों और स्वयं सहायता समूहों को खाद्य उत्पादों के प्रसंस्करण, मानकीकरण और विपणन में दक्ष बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अलसी आधारित नवाचारों पर केंद्रित यह पहल सस्ती पोषण उपलब्ध कराने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने में सहायक होगी।

यह पहल शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के बीच मजबूत सहयोग का परिणाम है, जो समावेशी विकास, तकनीकी उन्नति और सतत ग्रामीण विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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