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AI का युद्ध: ईरान–अमेरिका–इज़राइल संघर्ष में AI का बढ़ता उपयोग

  • इंटेलिजेंस से ड्रोन स्ट्राइक तक—AI बना युद्ध का नया कमांडर
  • डेटा, एल्गोरिद्म और मशीनें: आधुनिक युद्ध की बदलती परिभाषा

जावेद अख़्तर

आधुनिक युद्ध अब केवल हथियारों और सैनिकों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एक निर्णायक भूमिका निभा रही है। Iran, United States और Israel के बीच बढ़ते तनाव में AI युद्ध की रणनीति और संचालन दोनों को बदल रहा है।

सबसे प्रमुख उपयोग इंटेलिजेंस और निगरानी में हो रहा है। AI आधारित सिस्टम सैटेलाइट इमेज, ड्रोन फुटेज और संचार डेटा का विश्लेषण करके दुश्मन की गतिविधियों का सटीक अनुमान लगाते हैं। उदाहरण के तौर पर, इज़राइल का “Lavender AI System” हजारों संभावित लक्ष्यों की पहचान करने के लिए डेटा और संचार पैटर्न का विश्लेषण करता है, जिससे सैन्य कार्रवाई तेज और अधिक सटीक बनती है।

दूसरा महत्वपूर्ण क्षेत्र ड्रोन और स्वायत्त हथियार हैं। AI-संचालित ड्रोन बिना मानव हस्तक्षेप के लक्ष्य पहचानकर हमला कर सकते हैं। ईरान द्वारा विकसित “Shahed” ड्रोन इसका उदाहरण हैं, जो लंबी दूरी तय कर GPS और AI की मदद से अपने लक्ष्य तक पहुंचते हैं।

इसके अलावा साइबर युद्ध में भी AI का उपयोग बढ़ा है। AI एल्गोरिद्म दुश्मन के नेटवर्क में सेंध लगाने, फर्जी सूचना फैलाने और रक्षा प्रणालियों को बाधित करने में मदद करते हैं। वहीं, अमेरिका का “Project Maven” AI के जरिए ड्रोन फुटेज का विश्लेषण कर दुश्मन की गतिविधियों की पहचान करता है।

AI का एक और महत्वपूर्ण उपयोग निर्णय समर्थन प्रणाली में है, जहां मशीन लर्निंग मॉडल संभावित परिणामों का पूर्वानुमान लगाकर रणनीति बनाने में सहायता करते हैं।

हालांकि, इस तकनीक के साथ नैतिक और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी जुड़ी हैं, जैसे स्वायत्त हथियारों पर नियंत्रण और गलत निर्णय का खतरा।

निष्कर्षतः, आज का युद्ध केवल हथियारों का नहीं, बल्कि डेटा, एल्गोरिद्म और मशीनों का युद्ध बन चुका है, जहां AI गति, सटीकता और रणनीति—तीनों को नई दिशा दे रहा है।

(लेखक Technology & Digital Analyst  है)

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