नई दिल्ली, 28 सितंबर 2025 – वर्ल्ड फ़ूड इंडिया 2025 का तीसरा दिन बना तकनीक, सहयोग और ज्ञान-साझा का जीवंत मंच। यह दिन भारत को वैश्विक खाद्य नवाचार हब बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम साबित हुआ।
गूंजे तकनीक और इनोवेशन के सुर
पहले दो दिनों की जबरदस्त भागीदारी के बाद तीसरे दिन भी उत्साह बरकरार रहा। अब तक:
- 4,657 B2B
- 154 G2G
- और 9,564 RBSM बैठकें आयोजित हो चुकी हैं,
जिनमें कुल 35,784 लोग शामिल हुए।
मत्स्य पालन विभाग ने विशेष सत्र में “मछुआरों की समृद्धि के लिए मत्स्य तकनीक” पर चर्चाएं कीं। वहीं, सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल बिज़नेस ने पुनर्योजी वनस्पति तेल पर राष्ट्रीय गठबंधन की नींव रखी। बीएल एग्रो ने “राष्ट्र 2025: जोखिम विश्लेषण संगोष्ठी” के जरिए कृषि परिवर्तन की राह दिखायी।
प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और अहम एमओयू
- निफ्टेम-के ने इंटरलिंक फूड्स और जीवनमित्र न्यूट्रास्युटिकल्स को प्रमुख तकनीकें हस्तांतरित कीं, जो “सक्षम आंगनवाड़ी” और “मिशन पोषण 2.0” पहल को बढ़ावा देंगी।
- ग्रेटर नोएडा, इम्फाल, बैंगलोर और नई दिल्ली स्थित संस्थानों के साथ कई महत्वपूर्ण एमओयू साइन किए गए।
- निफ्टेम-टी ने भी महाराष्ट्र की एनवायरोकेयर लैब्स और ग्लोबल अलायंस फॉर इम्प्रूव्ड न्यूट्रिशन (GAIN) के साथ साझेदारी कर खाद्य संवर्धन और रिसर्च को नई दिशा दी।
- स्टार्ट-अप ग्रैंड चैलेंज 3.0 की विजेता फ्रूवेटेक प्राइवेट लिमिटेड के साथ भी समझौता हुआ।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नई उड़ान
भारत ने वैश्विक साझेदारी को और गहरा करने के लिए न्यूजीलैंड, जिम्बाब्वे और युगांडा के समकक्षों के साथ अहम G2G बैठकें कीं। इसका मकसद कृषि और खाद्य प्रसंस्करण में नए अवसरों और सहयोग को बढ़ाना है।
समापन
वर्ल्ड फ़ूड इंडिया 2025 का तीसरा दिन साबित हुआ कि यह आयोजन सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि सहयोग, नवाचार और निवेश का असली उत्सव है। यह मंच भारत को न सिर्फ अपनी खाद्य अर्थव्यवस्था में क्रांति लाने में मदद कर रहा है, बल्कि दुनिया के लिए भी नए अवसरों के द्वार खोल रहा है।
