नई दिल्ली। टेक्नोलॉजी और राजनीति की दुनिया में हलचल मचाने वाली बड़ी खबर सामने आई है। डोनाल्ड ट्रंप और यूट्यूब के बीच चला आ रहा हाई-प्रोफाइल विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। यूट्यूब ने ट्रंप के साथ समझौते के लिए 24.5 मिलियन डॉलर यानी करीब 204 करोड़ रुपये चुकाए हैं।
क्यों हुआ विवाद?
2021 में अमेरिकी कैपिटल हिल दंगे के बाद यूट्यूब ने डोनाल्ड ट्रंप का अकाउंट सस्पेंड कर दिया था। इस फैसले से नाराज़ ट्रंप ने जुलाई 2021 में गूगल, मेटा और X (पूर्व में ट्विटर) पर मुकदमा दर्ज कराया। ट्रंप का आरोप था कि इन टेक कंपनियों ने उनकी आवाज़ को दबाने और विचारों को सेंसर करने की कोशिश की।
एक-एक करके झुकीं बड़ी कंपनियाँ
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जनवरी 2025 में मेटा ने ट्रंप से समझौता करते हुए करीब 25 मिलियन डॉलर चुकाए।
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फरवरी 2025 में X ने भी 10 मिलियन डॉलर देकर विवाद सुलझाया।
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अब यूट्यूब ने भी हार मानते हुए 24.5 मिलियन डॉलर की डील कर ली।
पैसे कहाँ जाएंगे?
समझौते के तहत यूट्यूब द्वारा दिए गए 22 मिलियन डॉलर ट्रस्ट फॉर द नेशनल मॉल नाम की गैर-लाभकारी संस्था को मिलेंगे। यह संस्था व्हाइट हाउस के पास 200 मिलियन डॉलर की लागत से बन रहे 90,000 वर्ग फुट के भव्य बॉलरूम के निर्माण में सहयोग कर रही है। बाकी राशि अन्य दावेदारों के बीच बाँटी जाएगी, जिनमें अमेरिकन कंज़र्वेटिव यूनियन (ACU) और अमेरिकी लेखिका नाओमी वुल्फ शामिल हैं।
बड़ा सवाल
क्या यह समझौता कंपनियों की हार है या ट्रंप की रणनीतिक जीत? एक बात तय है कि यह मामला आने वाले दिनों में टेक्नोलॉजी और राजनीति दोनों क्षेत्रों में नई बहस छेड़ेगा।
