अफगानिस्तान के जवाबी हमले में 58 पाकिस्तानी सैनिक ढेर, कई घायल

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड रेखा पर भारी संघर्ष में तालिबान बलों ने पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया है। अफगान तालिबान सरकार के प्रवक्ता ज़बीहुल्ला मुजाहिद के अनुसार, पाकिस्तान के हवाई हमले के जवाब में तालिबान लड़ाकों ने सीमा पार कार्रवाई करते हुए कम से कम 58 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और 30 से अधिक को घायल कर दिया। तालिबान ने दावा किया है कि इस जवाबी अभियान में पाकिस्तान की कई सीमा चौकियों पर कब्ज़ा कर उन्हें ध्वस्त किया गया। दोनों पड़ोसी देशों के बीच यह झड़पें बीते कुछ वर्षों में सबसे भीषण मानी जा रही हैं और सीमा पर युद्ध जैसी स्थिति बन गई थी।

मुख्य बिंदु

  • तालिबान का दावा: रातभर चले सीमा-पार ऑपरेशन में 58 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और 30 घायल हुए। तालिबान बलों ने पाकिस्तानी सेना की 25 चौकियों पर कब्ज़ा करने और उनमें से कई को तबाह करने का दावा किया।

  • पाकिस्तान की प्रतिक्रिया: पाकिस्तान ने तालिबान के दावे को खारिज करते हुए कहा कि संघर्ष में उसके केवल 23 सैनिक हताहत हुए हैं। इस्लामाबाद ने उल्टा दावा किया कि पाकिस्तानी कार्रवाई में 200 से अधिक तालिबान व सहयोगी लड़ाके मारे गए, हालांकि स्वतंत्र तौर पर इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं हो सकी।

  • संघर्ष की वजह: गत सप्ताह पाकिस्तानी वायु सेना द्वारा अफगान क्षेत्र में किए गए हवाई हमलों के बाद दोनों पक्षों में तनाव भड़का। काबुल ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी विमानों ने अफगानिस्तान की हवाई सीमा का उल्लंघन कर बमबारी की, जिसके जवाब में तालिबान ने यह हमला किया।

  • तालिबान की चेतावनी: प्रवक्ता मुजाहिद ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि अफगानिस्तान पर होने वाले हर हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा और सीमा व हवाई क्षेत्र की रक्षा का अधिकार अफगानिस्तान को है। उन्होंने पाकिस्तान पर अपनी ज़मीन पर आईएसआईएस जैसे आतंकियों को पनाह देने का भी आरोप लगाया।

  • स्थिति नियंत्रण में: भीषण लड़ाई के बाद फिलहाल दोनों देशों ने तनाव कम करने के संकेत दिए हैं। सऊदी अरब और कतर जैसे मित्र देशों की मध्यस्थता से तालिबान ने अपनी कार्रवाई रोक दी। पाकिस्तान ने भी सभी मुख्य सीमा चौकियों को अस्थायी रूप से बंद कर सुरक्षा बढ़ा दी है।


संघर्ष कैसे भड़का?

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भरोसे की कमी और उग्रवाद को लेकर आरोप-प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं है। हाल के महीनों में तेहरिक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के आतंकियों ने पाकिस्तान में हमलों में तेज़ी लाई है, जिनके बारे में इस्लामाबाद का कहना है कि वे अफगानिस्तान में पनाह लिए हुए हैं। पाकिस्तान ने अफगान तालिबान सरकार से इन आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की, जिसे तालिबान ने खारिज किया है।

इसके जवाब में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में हवाई हमले किए, जिसमें राजधानी काबुल के ऊपर पाक विमानों की उड़ान और पूर्वी पक्तिका प्रांत के एक बाजार पर बमबारी शामिल थी। काबुल में मौजूद तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी की उपस्थिति में हुए इन हमलों ने अफगानिस्तान को भड़का दिया। तालिबान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया और बदले की कार्रवाई की चेतावनी दी थी।


तालिबान का पलटवार और बड़ा दावा

शनिवार देर रात तालिबान ने पाकिस्तानी सीमा चौकियों पर व्यापक हमला बोला, जिसे उन्होंने पाकिस्तान के हवाई हमले का “बदला” बताया। अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह अभियान कई मोर्चों पर चलाया गया और रातभर गोलीबारी होती रही। तालिबान लड़ाकों ने भारी तोपखाने और मशीनगनों का इस्तेमाल करके पाकिस्तान की अग्रिम चौकियों को निशाना बनाया।

खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में अंगूर अड्डा, बाजौर, कुर्रम, दीर और चित्राल सेक्टरों में तथा बलूचिस्तान के बरमचा इलाके में पाक सैन्य पोस्टों पर हमले किए गए। तालिबान प्रवक्ता ने दावा किया कि इन सटीक हमलों में पाकिस्तान की कई चौकियाँ नष्ट हो गईं और वहां मौजूद हथियार व सैन्य उपकरण पर अफगान बलों ने कब्ज़ा कर लिया।

ज़बीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि इस जवाबी कार्रवाई में 58 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हुई और 30 से अधिक घायल हुए। साथ ही, पाकिस्तानी सेना की 25 चौकियों पर तालिबान ने कब्जा कर लिया है। उनके मुताबिक अफगान बलों ने सीमा की तरफ से इन चौकियों पर धावा बोला और सीमा पार स्थित ठिकानों को तबाह किया। तालिबान के अनुसार इस ऑपरेशन में उन्हें काफी मात्रा में पाकिस्तानी हथियार भी हाथ लगे।

हालांकि, तालिबान ने स्वीकार किया है कि इन भिड़ंतों में उनके अपने लड़ाकों को भी नुकसान उठाना पड़ा — संघर्ष में अफगान पक्ष के लगभग 9 लड़ाके मारे गए। कुछ रिपोर्टों में तालिबान के 20 से अधिक लड़ाकों के हताहत होने की बात कही गई है।


पाकिस्तान का पक्ष: हताहत कम, ढाई सौ तालिबानी ढेर का दावा

पाकिस्तान ने इस हमले में हुए नुकसान को बहुत कम बताया है। पाक सेना की ओर से जारी बयान के मुताबिक इन झड़पों में उनके 23 जवान मारे गए हैं। इस्लामाबाद ने तालिबान के आंकड़े को खारिज करते हुए कहा कि अफगान पक्ष बढ़ा-चढ़ाकर दावे कर रहा है।

पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई में 200 से ज्यादा तालिबान लड़ाकों को मार गिराया तथा अनेक अफगान चौकियों को कुछ समय के लिए कब्जे में लिया। पाकिस्तान के प्रवक्ताओं ने तालिबान के हमलों को “गंभीर उकसावे की कार्रवाई” बताया और कहा कि अफगानिस्तान अपनी जमीन पर सक्रिय आतंकवादी समूहों पर लगाम लगाने में विफल रहा है।


तालिबान की चेतावनी – “हर हमला का मिलेगा कड़ा जवाब”

काबुल में प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्ला मुजाहिद ने पाकिस्तान को दो-टूक संदेश दिया कि अफगानिस्तान अपनी जमीन और आसमान की रक्षा करना बखूबी जानता है। उन्होंने कहा, “अगर कोई अफगानिस्तान पर हमला करेगा तो निर्णायक और कड़ा जवाब दिया जाएगा।”

मुजाहिद ने पाकिस्तान से अपनी सरज़मीं पर छिपे आतंकियों को तुरंत बाहर निकालने की मांग की। उन्होंने विशेष रूप से ISIS (इस्लामिक स्टेट) का ज़िक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने आईएसआईएस की मौजूदगी पर आँखे मूंद रखी हैं।

इन बयानों के बावजूद तालिबान ने कहा कि वे पाकिस्तान के आम लोगों और सेना के बाकी धड़ों के साथ दुश्मनी नहीं चाहते। उनका विरोध सिर्फ पाकिस्तान की सेना के उस “विशेष गुट” से है जो अफगानिस्तान में अशांति फैलाना चाहता है।


डूरंड लाइन विवाद और मौजूदा हालात

यह ताज़ा संघर्ष एक बार फिर डूरंड रेखा को लेकर पुरानी तल्ख़ी उजागर कर गया है। डूरंड लाइन 2,640 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो 1893 में ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच खींची गई थी। अफगानिस्तान की अब तक की सभी सरकारों (तालिबान सहित) ने इस रेखा को कभी औपचारिक मान्यता नहीं दी है, जबकि पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है।

हालिया हिंसा के बाद सीमा पर फिलहाल शांति बताई जा रही है। तालिबान सरकार के मुताबिक स्थिति नियंत्रण में है और उनकी ओर से हमला अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने कहा कि उनका देश पाकिस्तान के साथ विवाद का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है, लेकिन अगर शांति की कोशिशें नाकाम होती हैं, तो अन्य विकल्प भी खुले हैं।

पाकिस्तान ने एहतियाती कदम उठाते हुए तोर्खम और चमन बॉर्डर बंद कर दिए हैं, साथ ही खारलाची, अंगूर अड्डा और ग़ुलाम ख़ान जैसे छोटे रास्तों को भी सील कर दिया गया है। इन बंदिशों के चलते दोनों तरफ यात्रियों और मालवाहकों की आवाजाही रुक गई है।


तनाव कम करने की कोशिशें और आगे की राह

इस विवाद को कूटनीति से सुलझाने के प्रयास भी तेज हुए हैं। कतर और सऊदी अरब ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए तालिबान से आग्रह किया कि वह आगे की कार्रवाई रोक दे। तालिबान प्रशासन ने पुष्टि की कि मित्र देशों के अनुरोध पर आधी रात के बाद अभियान रोक दिया गया।

तालिबान के विदेश मंत्री मुत्तकी ने कहा कि उनका देश बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अपनी रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि उकसावे जारी रहे, तो अफगानिस्तान जवाबी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

विश्लेषकों का मानना है कि यह संघर्ष अब तक का सबसे गंभीर अफगान-पाक सैन्य टकराव है। दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी इतनी गहरी है कि छोटी-सी घटना भी बड़े संघर्ष का रूप ले सकती है। फिलहाल गोलीबारी बंद है, लेकिन अगर कूटनीतिक प्रयास असफल रहे, तो सीमा पर तनाव फिर भड़क सकता है।

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