12 राज्यों में 28 अक्टूबर से शुरू होगा वोटर लिस्ट अपडेट, 7 फरवरी तक चलेगा SIR

आमिर रिजवी
नई दिल्ली, 27 अक्टूबर

देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट अपडेट (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया 28 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 7 फरवरी 2026 तक चलेगी। इस दौरान नए वोटरों के नाम जोड़े जाएंगे, पुरानी गलतियाँ सुधारी जाएंगी और दोहराए गए या निष्क्रिय नाम हटाए जाएंगे।

 कौन-कौन से राज्य शामिल हैं?

इस बार जिन 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR होगा, उनमें शामिल हैं:
राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, केरल, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप।

 खास बात यह है कि अगले साल चुनाव वाले पश्चिम बंगाल में भी SIR होगा, जबकि असम में यह प्रक्रिया नहीं चलेगी क्योंकि वहां नागरिकता संबंधी नियम अलग हैं।


 पूरा शेड्यूल एक नजर में

प्रक्रिया तारीख
प्रिंटिंग व प्रशिक्षण 28 अक्टूबर से 3 नवंबर 2025
घर-घर मतदाता सत्यापन 4 नवंबर से 4 दिसंबर 2025
ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी 9 दिसंबर 2025
आपत्ति और दावा दर्ज करने की अंतिम तिथि 9 दिसंबर 2025 से 8 जनवरी 2026
सुनवाई व सत्यापन 9 दिसंबर 2025 से 31 जनवरी 2026
अंतिम मतदाता सूची जारी 7 फरवरी 2026

 SIR क्या है?

SIR यानी Special Intensive Revision — चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है जिसमें वोटर लिस्ट को पूरी तरह अपडेट किया जाता है।
इस दौरान:

  • 18 साल से ऊपर के नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं,

  • जो लोग स्थानांतरित हो चुके हैं या जिनका निधन हो गया है, उनके नाम हटाए जाते हैं,

  • वोटर लिस्ट में नाम, पते या अन्य विवरण की गलतियों को सुधारा जाता है।

बीएलओ (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी सत्यापित करते हैं।


 इतने लोग होंगे शामिल

इन 12 राज्यों में करीब 51 करोड़ मतदाता हैं। इस विशाल काम में 5.33 लाख BLO और 7 लाख से ज्यादा BLA (राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि) की तैनाती होगी।


 जरूरी दस्तावेज

SIR के दौरान नए मतदाता के रूप में नाम जुड़वाने या संशोधन के लिए इन दस्तावेजों की जरूरत होगी:

  • आधार कार्ड

  • पासपोर्ट

  • 10वीं की मार्कशीट

  • जन्म प्रमाणपत्र

  • पेंशनर पहचान पत्र

  • जाति प्रमाणपत्र

  • स्थायी निवास प्रमाणपत्र

  • सरकारी विभाग द्वारा जारी पहचान पत्र

  • परिवार या भूमि रजिस्टर में नाम


 SIR का मकसद क्या है?

1951 से 2004 तक कई बार यह प्रक्रिया हुई, लेकिन पिछले 21 सालों से यह स्थगित थी।
अब इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि:

  • कोई भी योग्य मतदाता छूटे नहीं,

  • और कोई भी अयोग्य या दोहरी प्रविष्टि वाला नाम सूची में न रहे।
    इससे चुनाव प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी व भरोसेमंद बनेगी।


 निष्कर्ष

चुनाव आयोग की यह पहल लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।
अगर आप 18 साल के हो गए हैं या आपकी जानकारी वोटर लिस्ट में गलत है — तो यह आपके लिए सुनहरा मौका है अपने वोट को सही कराने का।
BLO के आने पर अपनी जानकारी अवश्य जांचें और आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें।

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