भारत में एक बार फिर शुरू होने जा रही है दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या गणना—जनगणना 2027। यह सिर्फ एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की सामाजिक-आर्थिक तस्वीर को समझने का विशाल अभियान है।
दुनिया की सबसे बड़ी गिनती की शुरुआत
आज से इस ऐतिहासिक प्रक्रिया का पहला चरण शुरू हो गया है। यह जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी और इसकी संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 तय की गई है।
सबसे खास बात यह है कि भारत की जनगणना पहली बार पूरी तरह डिजिटल माध्यम से होगी। नागरिकों को स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प भी दिया गया है, जिससे वे खुद ऑनलाइन अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। यह सुविधा आज से शुरू होकर 15 अप्रैल तक उपलब्ध रहेगी।
पहले चरण में क्या होगा?
पहले चरण में मकान सूचीकरण और आवास गणना की जाएगी, जो 16 अप्रैल से 15 मई तक चलेगी।
इस दौरान:
- देश के हर भवन और संरचना की सूची बनाई जाएगी
- यह देखा जाएगा कि भवन आवासीय है या नहीं
- घरों में उपलब्ध सुविधाओं और परिसंपत्तियों की जानकारी जुटाई जाएगी
- हर भवन की जियो-टैगिंग की जाएगी
- प्रत्येक संरचना को एक विशिष्ट पहचान संख्या (Unique ID) दी जाएगी
30 लाख से ज्यादा कर्मियों की तैनाती
इतने विशाल अभियान को सफल बनाने के लिए देशभर में 30 लाख से अधिक गणनाकर्मी, पर्यवेक्षक और अधिकारी तैनात किए गए हैं।
नागरिक अपनी जानकारी 16 भाषाओं में ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया और भी आसान हो जाएगी।
दूसरा चरण: जनसंख्या की असली तस्वीर
जनगणना का दूसरा चरण अगले वर्ष फरवरी में आयोजित किया जाएगा। इसमें नागरिकों से जुड़ी अहम जानकारी एकत्र की जाएगी, जैसे:
- आयु
- लिंग
- व्यवसाय
- साक्षरता
- जाति संबंधी विवरण
सरकार ने मंजूर किए हजारों करोड़
इस विशाल राष्ट्रीय परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने 11,718 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को मंजूरी दी है।
पहाड़ी और बर्फबारी वाले इलाकों के लिए अलग तिथि
बर्फबारी वाले क्षेत्रों—
- लद्दाख
- जम्मू और कश्मीर
- हिमाचल प्रदेश
- उत्तराखंड
—में जनगणना की संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है, ताकि मौसम की कठिनाइयों के बीच भी काम सुचारू रूप से हो सके।
कुल मिलाकर, जनगणना-2027 सिर्फ आंकड़ों की गिनती नहीं, बल्कि भारत के वर्तमान और भविष्य की योजना बनाने का सबसे बड़ा आधार बनने जा रही है।
