देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार मामला सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि जांच एजेंसियों को शक है कि इसके पीछे एक संगठित “एजुकेेशन माफिया नेटवर्क” काम कर रहा था, जिसने लाखों रुपये लेकर छात्रों तक पेपर पहुंचाया।
जांच में सामने आया है कि परीक्षा से करीब 42 घंटे पहले WhatsApp ग्रुप्स और PDF फाइलों के जरिए कथित प्रश्नपत्र शेयर किए गए। शुरुआत में इसे “गेस पेपर” बताया गया, लेकिन बाद में कई सवाल असली NEET पेपर से मेल खाते पाए गए।
WhatsApp से खुला पूरा राज
सूत्रों के मुताबिक, एक मेडिकल छात्र को परीक्षा से पहले PDF फॉर्मेट में “गेस पेपर” मिला था। उसने यह फाइल अपने परिचितों को फॉरवर्ड कर दी। बाद में जब असली परीक्षा हुई तो कई प्रश्न हूबहू मैच हो गए। यहीं से पूरे रैकेट की परतें खुलनी शुरू हुईं।
जांच एजेंसियों का दावा है कि यह नेटवर्क राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में फैला हुआ था। पेपर कथित तौर पर 10 लाख से 25 लाख रुपये तक में बेचा गया।
CBI की एंट्री, कई गिरफ्तारियां
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को सौंप दी गई है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर लीक में अंदरूनी लोगों की भूमिका थी या नहीं। हाल ही में पुणे के एक केमिस्ट्री प्रोफेसर को इस केस का “किंगपिन” बताते हुए गिरफ्तार किया गया है।
CBI को शक है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कुछ लोग भी इस नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। जांच एजेंसी अब डिजिटल चैट, WhatsApp रिकॉर्ड और पैसों के लेनदेन की जांच कर रही है।
छात्रों में गुस्सा, सिस्टम पर सवाल
इस पूरे विवाद ने लाखों NEET अभ्यर्थियों की मेहनत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर छात्र लगातार परीक्षा दोबारा कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
अब क्या होगा?
केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में NEET परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड बनाया जा सकता है ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। शिक्षा मंत्रालय ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा भी दिया है।
