क्या थीं ईरान की शर्तें जिन पर हुआ सीजफायर, और अब कहां होगी बातचीत?

अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए सीजफायर के पीछे कई अहम शर्तें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि ईरान ने कुल 8 बड़ी शर्तें रखीं, जिनके आधार पर दोनों देशों के बीच अस्थायी युद्धविराम संभव हो सका।  सूत्रों के मुताबिक इन सभी प्रस्तावों और शर्तों पर आगे की रणनीति तय करने के लिए 10 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक अहम बैठक होने वाली है। इस बैठक में अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय सहयोगियों के प्रतिनिधि इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा कर सकते हैं,

1. ईरान पर सभी हमले रोकने की मांग

अमेरिका और इजरायल द्वारा हाल के हफ्तों में ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर कई हमले किए गए। ईरान का कहना है कि स्थायी शांति के लिए सबसे पहले उसके खिलाफ सभी हवाई और सैन्य हमले पूरी तरह बंद होने चाहिए।


2. सभी प्रतिबंधों से राहत

ईरान पर वर्षों से अमेरिका और पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रतिबंध लगे हुए हैं। इन प्रतिबंधों की वजह से ईरान की अर्थव्यवस्था, तेल निर्यात और बैंकिंग प्रणाली पर भारी असर पड़ा है। इसलिए ईरान युद्धविराम के साथ प्रतिबंधों में राहत की मांग कर रहा है।


3. भविष्य में फिर हमले न करने की गारंटी

ईरान चाहता है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की ओर से लिखित या औपचारिक आश्वासन दिया जाए कि भविष्य में उसके खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी। इससे क्षेत्र में स्थायी स्थिरता बनाने की कोशिश होगी।


4. इजराइली हमले रोकने की मांग (हिजबुल्लाह समेत)

ईरान का आरोप है कि इजरायल उसके सहयोगी संगठनों और ठिकानों पर लगातार हमले करता है। इसलिए ईरान चाहता है कि इजरायल द्वारा लेबनान और क्षेत्र में हिजबुल्लाह या अन्य ईरान समर्थित समूहों पर किए जाने वाले हमले भी रोके जाएं।


5. ईरान को मुआवजा देना

ईरान का कहना है कि हाल के हमलों में उसके कई सैन्य और नागरिक ठिकानों को नुकसान हुआ है। इसलिए वह अमेरिका और सहयोगी देशों से इस नुकसान की भरपाई के लिए आर्थिक मुआवजे की मांग कर रहा है।


6. क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी

मध्य-पूर्व में अमेरिका के कई सैन्य अड्डे और युद्धपोत मौजूद हैं। ईरान का मानना है कि इनकी मौजूदगी से तनाव बढ़ता है, इसलिए वह क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों को वापस बुलाने की मांग कर रहा है।


7. होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग पर नियंत्रण

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल लगभग 20% आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान चाहता है कि इस मार्ग पर सुरक्षा और निगरानी में उसकी प्रमुख भूमिका रहे।


8. होर्मुज स्ट्रेट खोलने के बदले प्रति जहाज 20 मिलियन डॉलर शुल्क

तनाव के कारण ईरान ने इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही को लेकर कड़े संकेत दिए थे। अब प्रस्ताव है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने के बदले हर गुजरने वाले जहाज से लगभग 20 मिलियन डॉलर शुल्क लिया जाए, जिसे ईरान सुरक्षा शुल्क के रूप में देखता है।


आगे क्या होगा?

बताया जा रहा है कि इन सभी प्रस्तावों और शर्तों पर 10 अप्रैल से पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली बैठक में विस्तार से चर्चा होगी। इस बैठक में युद्धविराम को आगे बढ़ाने और स्थायी समझौते की संभावनाओं पर बातचीत की जा सकती है।

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