हॉर्मुज तनाव, नौसैनिक नाकेबंदी और सख्त शर्तों ने बिगाड़ा मामला—शांति वार्ता पर लटका सवाल
तेहरान/वॉशिंगटन:
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता एक बार फिर संकट में फंस गई है। तेहरान ने साफ संकेत दे दिया है कि वह प्रस्तावित बातचीत में शामिल नहीं होगा। ईरान ने इस पूरे विवाद के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए ‘ब्लेम गेम’ खेलने का आरोप लगाया है।
क्यों भड़का ईरान?
ईरान का कहना है कि—
- अमेरिका अवास्तविक और “अत्यधिक” शर्तें रख रहा है
- बार-बार अपनी स्थिति बदल रहा है
- और सबसे बड़ा मुद्दा—समुद्री नाकेबंदी अभी भी जारी है
तेहरान का मानना है कि ऐसे माहौल में बातचीत का कोई मतलब नहीं है।
हॉर्मुज और नाकेबंदी बना सबसे बड़ा विवाद
- अमेरिका ने हाल ही में ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू की है
- ईरान इसे युद्ध जैसी कार्रवाई मान रहा है
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार टकराव
यही वजह है कि दोनों देशों के बीच भरोसा लगभग खत्म होता दिख रहा है।
बातचीत या टकराव? दोनों साथ-साथ
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ अमेरिका बातचीत की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ सख्त चेतावनी भी दे रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान के अहम ढांचों पर कार्रवाई कर सकता है।
दुनिया क्यों चिंतित?
- हॉर्मुज से गुजरता है दुनिया का बड़ा तेल
- तनाव बढ़ा तो तेल सप्लाई प्रभावित
- वैश्विक बाजार में भारी उथल-पुथल
पहले से ही इस टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर दिखने लगा है।
क्या पूरी तरह टूट जाएगी वार्ता?
हालात भले ही बिगड़ते दिख रहे हों, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि आखिरी वक्त पर बातचीत फिर शुरू हो सकती है।
हालांकि, मौजूदा हालात में यह साफ है कि—
– भरोसा खत्म
– शर्तें सख्त
– और टकराव का खतरा बढ़ता जा रहा है
निष्कर्ष:
US-ईरान रिश्ते इस वक्त बेहद नाजुक मोड़ पर हैं। एक तरफ बातचीत की कोशिशें हैं, तो दूसरी तरफ युद्ध जैसी स्थिति। अब देखना होगा कि कूटनीति जीतती है या टकराव दुनिया को नई मुश्किल में डाल देता है।
