नेपाल इस हफ्ते अचानक भड़के विरोध प्रदर्शनों से हिल गया। राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में आगज़नी, तोड़फोड़ और झड़पों के चलते प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफ़ा तक देना पड़ा। यह आंदोलन युवाओं, खासकर ‘जेन ज़ी’ वर्ग से शुरू हुआ और धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया। आइए समझते हैं इस विद्रोह की पाँच मुख्य वजहें—
1. सोशल मीडिया पर प्रतिबंध
4 सितंबर को ओली सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, ट्विटर, यूट्यूब समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर बैन लगा दिया। सरकार का दावा था कि ये कंपनियां नेपाल के क़ानूनों का पालन नहीं कर रहीं। लेकिन यह फ़ैसला लाखों युवाओं के लिए असुविधा का कारण बना और गुस्सा सड़कों तक पहुँच गया।
2. भ्रष्टाचार और घोटाले
विरोध की दूसरी बड़ी वजह लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार के मामले थे। नेताओं, पूर्व प्रधानमंत्रियों और मंत्रियों तक के नाम हाल के घोटालों में उछले। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में नेपाल दुनिया के सबसे भ्रष्ट देशों की सूची में है। यही वजह रही कि प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ भी जमकर नारे लगाए।
3. युवाओं का पलायन
आर्थिक अवसरों की कमी ने नेपाली युवाओं को निराश किया। आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक़ रोज़ाना दो हज़ार से ज़्यादा युवा रोज़गार और शिक्षा के लिए नेपाल छोड़ रहे हैं। कृषि भूमि खाली हो रही है और देश की कार्यशक्ति घट रही है। हालांकि विदेश से भेजी जा रही रकम (रेमिटेंस) अर्थव्यवस्था को कुछ हद तक संभाल रही है।
4. राजनीतिक अस्थिरता और मोहभंग
लगातार बदलती सरकारें, निवेश की कमी और भाई-भतीजावाद की राजनीति ने युवाओं का भरोसा तोड़ दिया। नेपाल में उच्च शिक्षा और नौकरियों के मौके सीमित हैं, जबकि ‘नेपो किड्स’ कहलाने वाले नेताओं के करीबी युवा राजनीतिक फ़ायदे उठा रहे हैं। यही असमानता नई पीढ़ी को और भड़काने लगी।
5. विद्रोह में घुसपैठ
सरकार ने दावा किया कि “निहित स्वार्थी समूहों” ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को हिंसक रूप दिया। काठमांडू की ऐतिहासिक इमारतों और नेताओं के घरों पर हमले इसी घुसपैठ का नतीजा बताए गए। वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आंदोलन को “हाईजैक” कर लिया गया।
