नेपाल को मिली नई दिशा: संवैधानिक संकट खत्म, सुशीला कार्की ने संभाली सत्ता, भारत ने कहा—अब शांति की बारी

नई दिल्ली। नेपाल के लंबे संवैधानिक संकट का अंत करते हुए देश को नया नेतृत्व मिल गया है। नेपाल की पहली महिला प्रधान न्यायाधीश रह चुकीं सुशीला कार्की अब देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बन गई हैं। भारतीय समयानुसार शुक्रवार रात 8:45 बजे (नेपाली समय रात 9 बजे) राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शीतल निवास में आयोजित विशेष समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।


सात घंटे की अहम बैठक के बाद बना रास्ता

कार्की को प्रधानमंत्री बनाने का निर्णय काठमांडू में हुई करीब सात घंटे लंबी बैठक में लिया गया। इस बैठक में राष्ट्रपति पौडेल के साथ सेना प्रमुख सिगडेल, कानूनविद आर्याल, सुशीला कार्की और जेन-जी के प्रतिनिधि शामिल हुए। व्यापक चर्चा के बाद सर्वसम्मति से अंतरिम सरकार बनाने पर सहमति बनी।


छह महीने की अंतरिम सरकार, मार्च 2026 में चुनाव

यह अंतरिम सरकार छह महीने तक काम करेगी। तय योजना के अनुसार मार्च 2026 में संसदीय चुनाव कराए जाने की संभावना है। बैठक में हिंसा के जिम्मेदारों पर कार्रवाई के लिए न्यायिक आयोग और सुशासन सुनिश्चित करने के लिए भ्रष्टाचार निवारक आयोग बनाने पर भी सहमति बनी।


भारत ने जताई शांति और स्थिरता की उम्मीद

भारत ने इस नए राजनीतिक बदलाव का स्वागत किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि भारत नेपाल में नई अंतरिम सरकार के गठन का स्वागत करता है और उम्मीद करता है कि सुशीला कार्की का नेतृत्व देश में शांति और स्थिरता को मजबूत करेगा। मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत दोनों देशों और उनके नागरिकों की भलाई और समृद्धि के लिए नेपाल के साथ मिलकर काम करता रहेगा।


नेपाल की राजनीतिक पारी में यह कदम ऐतिहासिक है, जहां न्यायपालिका से लेकर कार्यपालिका तक एक महिला ने नेतृत्व की बागडोर संभाली है। सुशीला कार्की की यह नियुक्ति नेपाल में न केवल महिला सशक्तिकरण की मिसाल है बल्कि स्थिरता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की दिशा में एक अहम पड़ाव भी है।

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