डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली – संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र में भारत की ओर से बोलते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ऐसा भाषण दिया जिसने पूरे विश्व का ध्यान खींचा। उन्होंने शुरुआत ही आत्मीय अभिवादन से की—“भारत की जनता की ओर से नमस्कार।” इसके साथ ही उन्होंने साफ संकेत दिया कि भारत अब सिर्फ सुनने वाला नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर निर्णायक भूमिका निभाने वाला देश है।
आत्मनिर्भरता, आत्मरक्षा और आत्मविश्वास
जयशंकर ने कहा कि आज की दुनिया को भारत तीन मूल मंत्रों से देखता है—आत्मनिर्भरता, आत्मरक्षा और आत्मविश्वास। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अपनी जनता की सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
आतंकवाद पर सख्त रुख
अपने संबोधन में उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए स्पष्ट संदेश दिया: “भारत आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाता है।” उन्होंने मजबूत सीमा रक्षा, वैश्विक साझेदारी और विदेशों में भारतीय समुदाय की मदद को भारत की प्राथमिकताओं में गिनाया। यह बयान स्पष्ट रूप से पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष लेकिन करारा जवाब था।
ग्लोबल साउथ की आवाज
जयशंकर ने यह भी दोहराया कि भारत अपनी स्वतंत्र सोच बनाए रखेगा और ग्लोबल साउथ की आवाज बनकर उभरता रहेगा।
उनका यह भाषण न केवल भारत की विदेश नीति का रोडमैप दिखाता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की नई ताकत और आत्मविश्वास का भी ऐलान करता है।
