40 दिन बाद थमी अमेरिका-ईरान जंग: 2 हफ्ते का सीजफायर

  • हमले की तय डेडलाइन से करीब 90 मिनट पहले आया युद्धविराम का फैसला।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और बातचीत शुरू करने की संभावना।
  • वैश्विक तेल बाजार और मध्य-पूर्व की सुरक्षा पर पड़ सकता है बड़ा असर।

नई दिल्ली:
करीब 40 दिनों से जारी अमेरिका-ईरान युद्ध में आखिरकार फिलहाल विराम लग गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के लिए युद्धविराम (सीजफायर) लागू किया जा रहा है। यह फैसला ऐसे समय में आया जब ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य हमले की अंतिम समयसीमा तय कर रखी थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की अपील के बाद उन्होंने अपनी तय समयसीमा को आगे बढ़ाने और अस्थायी युद्धविराम का फैसला किया। इस कूटनीतिक पहल के बाद दोनों पक्षों ने दो सप्ताह के लिए सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई।

90 मिनट पहले आया बड़ा फैसला

खबरों के अनुसार, ट्रंप ने यह घोषणा हमले की तय डेडलाइन से करीब 90 मिनट पहले की। पहले उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान के बुनियादी ढांचे—जैसे पुल और पावर प्लांट—पर बड़े हमले किए जा सकते हैं। लेकिन अंतिम समय में कूटनीतिक रास्ता चुना गया और युद्धविराम का ऐलान कर दिया गया।

होर्मुज जलडमरूमध्य भी समझौते की शर्त

इस अस्थायी समझौते के तहत ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का संकेत दिया है। यही रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति के बड़े हिस्से के लिए बेहद अहम माना जाता है। समझौते की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भी गिरावट देखी गई।

इस जंग की शुरुआत कैसे हुई

यह संघर्ष फरवरी 2026 के अंत में तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ठिकानों पर हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने भी क्षेत्र में अमेरिकी और सहयोगी ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे पूरे मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ गया।

अब आगे क्या?

विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थायी शांति नहीं बल्कि एक अस्थायी विराम है। अगले दो हफ्तों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत होने की संभावना है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह दो हफ्ते का सीजफायर मध्य-पूर्व में लंबे समय से चल रहे तनाव को स्थायी शांति की दिशा में ले जा पाएगा या नहीं।

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