– रिकॉर्ड 437 दाखिले, MBA में 100% प्लेसमेंट
कुंडली, सोनीपत। राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM-K), कुंडली, सोनीपत में आयोजित स्थापना दिवस समारोह में देश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के भविष्य, नवाचार, स्टार्टअप, पोषण और टिकाऊ खाद्य प्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन हुआ। इस अवसर पर वक्ताओं ने संस्थान की स्थापना से लेकर अब तक की उल्लेखनीय यात्रा और उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए NIFTEM-K को खाद्य प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर अग्रणी संस्थान बनाने का आह्वान किया।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री देवेश देवल ने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में NIFTEM-K को अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता का पर्याय और देश के लिए पथ-प्रदर्शक बनना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को नौकरी पाने तक सीमित न रहकर अपने तकनीकी और प्रबंधन कौशल के बल पर उद्यमी और रोजगार सृजक बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने Startup India और PMFME जैसी पहलों के माध्यम से खाद्य क्षेत्र में उद्यमिता की संभावनाओं को भी रेखांकित किया।
INSA के अध्यक्ष एवं CSIR के पूर्व महानिदेशक प्रो. शेखर सी. मांडे ने पोषण, टिकाऊ कृषि, जल संकट, खाद्य अपशिष्ट और personalized nutrition को भविष्य की प्रमुख चुनौतियां बताते हुए कहा कि विज्ञान, नवाचार और जनभागीदारी के माध्यम से ही खाद्य एवं जलवायु सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव है।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के पूर्व सचिव श्री राकेश कक्कड़ ने NIFTEM-K की स्थापना के संघर्षपूर्ण दौर को याद करते हुए करीब ₹400 करोड़ के शुरुआती निवेश, UGC मान्यता हासिल करने की चुनौतियों और जुलाई 2012 में पहले शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से जुड़े संस्मरण साझा किए। उन्होंने विश्वास जताया कि संस्थान भारत ही नहीं, विश्व स्तर पर अग्रणी बनने की क्षमता रखता है।
NIFTEM-K के संस्थापक कुलपति श्री अजीत कुमार ने बताया कि लगभग खाली 100 एकड़ परिसर में कभी पेड़ के नीचे बैठकर संस्थान की योजनाएं बनाई जाती थीं। सरकार द्वारा 2014 तक का समय दिए जाने के बावजूद टीम ने 2012 में ही पाठ्यक्रम शुरू कर दिए। उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण को “सोने की खान” बताते हुए विद्यार्थियों से जॉब सीकर के बजाय जॉब क्रिएटर बनने का आह्वान किया।
NIFTEM-K के निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय ने संस्थान की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि इस वर्ष रिकॉर्ड 437 दाखिले हुए। MBA में 100%, B.Tech में 96% और M.Tech में 90% से अधिक प्लेसमेंट दर्ज किया गया। 70 कंपनियां प्लेसमेंट के लिए पहुंचीं, 32 तकनीकों का हस्तांतरण हुआ और संस्थान द्वारा समर्थित स्टार्टअप्स की संख्या बढ़कर 75 हो गई। उन्होंने NIFTEM-K को “फूड टेक्नोलॉजी का IIT” और “फूड बिजनेस मैनेजमेंट का IIM” बनाने के लक्ष्य को दोहराया।
इस अवसर पर NIFTEM-K में उत्कृष्ट शोध, अनुसंधान फंडिंग, प्रयोगशाला विकास एवं प्रशासनिक कार्यों में उल्लेखनीय और अमूल्य योगदान देने वाले कर्मचारियों को सम्मानित किया गया।
