सबरीमाला से दाऊदी बोहरा तक—धार्मिक परंपराओं से जुड़े कई मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

  • सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई।
  • दाऊदी बोहरा खतना और मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा भी शामिल।
  • पारसी महिलाओं के धार्मिक अधिकारों पर भी सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार।


नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट में धार्मिक परंपराओं और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े कई अहम मामलों पर एक साथ सुनवाई की जा रही है। इनमें केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा, दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित खतना (FGM) की प्रथा, मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश का अधिकार और पारसी महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश जैसे मामले शामिल हैं।

दरअसल, साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी। कोर्ट ने कहा था कि केवल जैविक आधार पर महिलाओं को मंदिर में प्रवेश से रोकना संविधान के समानता के अधिकार के खिलाफ है।

हालांकि इस फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गई थीं। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं के साथ-साथ अन्य धार्मिक प्रथाओं से जुड़े मामलों को भी बड़ी संवैधानिक पीठ के पास भेज दिया, ताकि यह तय किया जा सके कि धार्मिक परंपराओं और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

इन मामलों में दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं के खतना की प्रथा, मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश का अधिकार और गैर-पारसी से शादी करने वाली पारसी महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ इन सभी मामलों पर सुनवाई कर यह तय करेगी कि धार्मिक परंपराओं की सीमा क्या है और संविधान में दिए गए समानता व स्वतंत्रता के अधिकार किस तरह लागू होंगे।

इस सुनवाई को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसका असर देश में धार्मिक परंपराओं और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े कई विवादित मुद्दों पर पड़ सकता है।

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