ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ मेडिटेशन लीडर्स में उपराष्ट्रपति बोले – “शांत और समृद्ध विश्व के निर्माण के लिए ध्यान आवश्यक”

नई दिल्ली, 5 अप्रैल। भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ मेडिटेशन लीडर्स में देश-विदेश के आध्यात्मिक नेताओं, नीति निर्माताओं और विद्वानों ने ध्यान (मेडिटेशन) के माध्यम से शांति, संतुलन और समग्र जीवन शैली को बढ़ावा देने पर जोर दिया। कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति डॉ. सी. पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति डॉ. सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि आज विश्व अनेक प्रकार के संघर्षों और तनावों से गुजर रहा है। युद्ध केवल देशों के बीच ही नहीं, बल्कि परिवारों और समाज के भीतर भी देखने को मिल रहे हैं, जिनका मुख्य कारण अहंकार, असहिष्णुता और एक-दूसरे को न सुनने की प्रवृत्ति है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में ध्यान मानव जीवन में शांति, संतुलन और सकारात्मकता लाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि ध्यान व्यक्ति को आत्मचिंतन, धैर्य और बेहतर निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है। प्रतिदिन कुछ समय ध्यान करने से तनाव कम होता है, मन में स्पष्टता आती है और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज की तेज़ रफ्तार जीवनशैली में लोग जीने के बजाय केवल भाग रहे हैं। ऐसे में ध्यान व्यक्ति को स्वयं के भीतर झांकने और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने का अवसर देता है। उन्होंने यह भी कहा कि ध्यान युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने में सहायक हो सकता है, क्योंकि यह मन को नियंत्रित करने और सकारात्मक दिशा देने की शक्ति प्रदान करता है।

इस अवसर पर पद्मश्री डी. आर. कार्तिकेयन, पूर्व निदेशक, सीबीआई एवं पूर्व महानिदेशक, सीआरपीएफ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 2015 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया, जिससे पूरी दुनिया में योग के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ी। उन्होंने कहा कि इसी पहल से प्रेरित होकर 21 दिसंबर, 2024 को विश्व ध्यान दिवस मनाने की शुरुआत की गई, जिसे योग और ध्यान के पूरक अभ्यास के रूप में देखा जाता है।

क्वांटम लाइफ यूनिवर्सिटी की सह-संस्थापक डॉ. लक्ष्मी कोंडावेटी ने अपने संबोधन में पिता-पुत्र का एक प्रेरक उदाहरण देते हुए कहा कि जीवन की सच्ची खुशियाँ भविष्य में नहीं, बल्कि वर्तमान में मिलती हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपने वर्तमान को संतुलित और आनंदपूर्ण ढंग से जीना सीखना चाहिए।

परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष एवं आध्यात्मिक प्रमुख पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा कि आज दुनिया को केवल मेडिसिन नहीं, बल्कि मेडीटेशन की अधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व को योद्धाओं की नहीं, बल्कि बुद्ध की करुणा और शांति के मार्ग की जरूरत है। भारत ध्यान और आध्यात्मिकता के संदेश के माध्यम से विश्व में शांति का अग्रदूत बन सकता है।

कार्यक्रम के दौरान आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर, ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव और पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटी मूवमेंट के संस्थापक ब्रह्मऋषि पितामह पत्रिजी ने वीडियो संदेश के माध्यम से अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम का समापन क्वांटम लाइफ यूनिवर्सिटी के संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. न्यूटन कोंडावेटी द्वारा सभी प्रतिभागियों को सात मिनट का सामूहिक ध्यान कराकर किया गया। इस सम्मेलन के माध्यम से विश्व में शांति, संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली के लिए ध्यान के महत्व का संदेश दिया गया। ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ मेडिटेशन लीडर्स के तीन दिवसीय कार्यक्रम में विश्वभर के डॉक्टरों, शोधकर्ताओं, आध्यात्मिक गुरुओं और वैज्ञानिकों ने भाग लिया।

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