19 हजार के लिए बहन का कंकाल लाया जीतू, अब मिले 15 लाख; मरी बहन को बैंक बुलाने वाला मैनेजर छुट्टी पर

बहन की मौत का सबूत देने कंधे पर कंकाल लेकर बैंक पहुंचा भाई, ओडिशा की इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया

ओडिशा के क्योंझर जिले से सामने आई एक तस्वीर ने पूरे देश को अंदर तक हिला दिया। एक गरीब आदिवासी भाई अपनी बहन का कंकाल कंधे पर उठाकर बैंक पहुंच गया। वजह सिर्फ इतनी थी कि बैंक को उसकी बहन की मौत पर भरोसा नहीं हो रहा था।

यह दर्दनाक कहानी है क्योंझर जिले के डायनाली गांव निवासी जीतू मुंडा की। उसकी बहन कलरा मुंडा की जनवरी में बीमारी से मौत हो गई थी। बहन के खाते में करीब 19 हजार रुपये जमा थे, जिन्हें निकालने के लिए जीतू कई बार बैंक गया। लेकिन हर बार उससे मौत का प्रमाण पत्र और कानूनी दस्तावेज मांगे गए।

गांव का गरीब और अशिक्षित आदिवासी जीतू बैंक की प्रक्रिया को समझ नहीं पाया। बार-बार चक्कर लगाने और मदद न मिलने से परेशान होकर उसने ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए। वह बहन की कब्र खोदकर उसका कंकाल निकाल लाया और करीब 3 किलोमीटर पैदल चलकर ओडिशा ग्रामीण बैंक की शाखा पहुंच गया।

बैंक के बाहर कंकाल के साथ खड़े जीतू का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लोगों ने इसे व्यवस्था की असंवेदनशीलता और गरीबों के प्रति सिस्टम की बेरुखी बताया। सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने इस घटना पर गुस्सा जताया और सवाल पूछा कि क्या अब किसी गरीब को अपने परिजन की मौत साबित करने के लिए शव लेकर आना पड़ेगा?

मामला तूल पकड़ने के बाद प्रशासन हरकत में आया। जिला प्रशासन ने तत्काल मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी वारिस प्रमाण पत्र जारी कराया, जिसके बाद बैंक ने परिवार को 19,402 रुपये सौंप दिए। साथ ही रेड क्रॉस फंड से आर्थिक सहायता भी दी गई।

इस घटना के बाद देशभर में ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था और आदिवासी इलाकों में जागरूकता की कमी पर बहस शुरू हो गई है। कई लोगों ने कहा कि नियम जरूरी हैं, लेकिन इंसानियत उससे भी ज्यादा जरूरी है।

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