विजय ने लगातार तीसरे दिन सरकार बनाने का दावा किया
Digital Desk
तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या अभिनेता से नेता बने Vijay आखिर सरकार बना पाएंगे? चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद उनकी पार्टी TVK अभी भी सत्ता की दहलीज पर अटकी हुई है और अब सहयोगी दलों ने अपने राजनीतिक दांव चलने शुरू कर दिए हैं।
‘समर्थन चाहिए तो डिप्टी CM पद दीजिए’
तमिलनाडु की दलित राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाली VCK यानी विदुथलई चिरुथयगल काची ने TVK सरकार को समर्थन देने के संकेत तो दिए हैं, लेकिन साथ ही बड़ी मांग भी रख दी है। पार्टी चाहती है कि उसके प्रमुख Thol. Thirumavalavan को उप-मुख्यमंत्री बनाया जाए।
सूत्रों के मुताबिक VCK की हाई-लेवल बैठक में कई नेताओं ने साफ कहा कि अगर पार्टी सरकार को समर्थन देती है, तो उसे सत्ता में “सम्मानजनक हिस्सेदारी” मिलनी चाहिए। इतना ही नहीं, पार्टी के कुछ नेताओं ने VCK उप-महासचिव वन्नी अरसु को भी मंत्री बनाने की मांग उठा दी।
विजय के पास नंबर हैं… लेकिन पूरी राहत नहीं
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत के लिए 118 विधायक चाहिए। कांग्रेस, CPI और CPM जैसे दलों ने समर्थन का ऐलान कर दिया है, जिससे विजय का आंकड़ा बहुमत के करीब पहुंच गया है।
हालांकि VCK का अंतिम फैसला अभी भी पूरी तरह साफ नहीं माना जा रहा। यही वजह है कि चेन्नई की राजनीति में लगातार बैठकों और बैकडोर बातचीत का दौर जारी है।
दलित राजनीति और सत्ता संतुलन का नया खेल
VCK केवल पद नहीं चाहती, बल्कि उसने कुछ वैचारिक शर्तें भी सामने रखी हैं। पार्टी नेताओं ने मांग की है कि नई सरकार दलित सुरक्षा को प्राथमिकता दे, ऑनर किलिंग के खिलाफ विशेष कानून बनाए और सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ सख्त रुख अपनाए।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर विजय VCK की शर्तें मान लेते हैं, तो उनकी सरकार को स्थिरता मिल सकती है। लेकिन इससे सत्ता में साझेदारी का नया समीकरण भी बनेगा, जहां TVK को अपने सहयोगियों को ज्यादा राजनीतिक जगह देनी पड़ेगी।
तमिलनाडु में बदल रही राजनीति की पटकथा
कभी DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूमने वाली तमिलनाडु की राजनीति अब पूरी तरह बदलती दिख रही है। Vijay की एंट्री ने राज्य में नई राजनीतिक धुरी बना दी है और अब छोटी पार्टियां भी सत्ता गठन में “किंगमेकर” की भूमिका निभाती नजर आ रही हैं।
