- पहले छोटे हमले से दुश्मन को उकसाया जाता है, फिर किया जाता है बड़ा हमला।
- ड्रोन और मिसाइलों के जरिए आधुनिक युद्ध में बढ़ रहा है इस रणनीति का इस्तेमाल।
आमिर रिज़वी
मध्य-पूर्व में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के दौरान अक्सर “डबल ट्रैप अटैक” की रणनीति की चर्चा होती है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार डबल ट्रैप हमला ऐसी युद्ध रणनीति है जिसमें दुश्मन को पहले एक जाल में फंसाया जाता है और फिर उसकी प्रतिक्रिया का फायदा उठाकर दूसरा, ज्यादा घातक हमला किया जाता है।
इस रणनीति में पहला हमला अक्सर छोटा या भटकाने वाला होता है, जिसका उद्देश्य दुश्मन की रक्षा प्रणाली को सक्रिय करना या उसकी सेना को किसी खास दिशा में केंद्रित करना होता है। जब विरोधी पक्ष अपनी प्रतिक्रिया देता है, तब दूसरा और मुख्य हमला किया जाता है।
ड्रोन और मिसाइल के जरिए किया जाता है इस्तेमाल
आधुनिक युद्ध में डबल ट्रैप रणनीति का इस्तेमाल अक्सर ड्रोन और मिसाइलों के जरिए किया जाता है। उदाहरण के तौर पर पहले चरण में सस्ते या कम ताकत वाले ड्रोन भेजे जाते हैं, जिससे विरोधी देश की एयर डिफेंस प्रणाली सक्रिय हो जाती है। जब रक्षा प्रणाली इन ड्रोन को रोकने में व्यस्त होती है, तब दूसरे चरण में ज्यादा शक्तिशाली मिसाइलों से हमला किया जाता है।
रक्षा कमजोर होने पर किया जाता है मुख्य हमला
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस रणनीति का मकसद दुश्मन की रक्षा क्षमता को कमजोर करना और उसे भ्रमित करना होता है। पहले हमले के कारण जब सेना और सुरक्षा प्रणाली एक दिशा में व्यस्त हो जाती है, तब दूसरी जगह या दूसरे चरण में असली हमला किया जाता है।
मध्य-पूर्व के मौजूदा हालात में भी विश्लेषकों का कहना है कि आधुनिक तकनीक, ड्रोन और मिसाइलों के कारण इस तरह की दो-स्तरीय रणनीतियां भविष्य के युद्धों में और ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
