नई दिल्ली/नोएडा:
नोएडा की सड़कों पर मजदूरों की नाराजगी ने ऐसा रूप लिया कि पूरा औद्योगिक इलाका मानो जंग का मैदान बन गया। वेतन बढ़ाने की मांग लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन देखते ही देखते हिंसा, आगजनी और पथराव में बदल गया।
बताया जा रहा है कि करीब 40 हजार से ज्यादा मजदूर अलग-अलग जगहों पर सड़कों पर उतर आए। गुस्से का स्तर इतना बढ़ गया कि कई जगह गाड़ियों में आग लगा दी गई, तोड़फोड़ हुई और पुलिस पर पथराव किया गया।
स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने सख्ती दिखाई और 300 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
कैसे भड़की आग?
इस पूरे विवाद की जड़ है वेतन असमानता। हरियाणा में मजदूरी बढ़ने के बाद नोएडा के मजदूरों में नाराजगी बढ़ गई। उनका आरोप है कि उन्हें तय न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल रहा, जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है।
अब ‘पाकिस्तान एंगल’ क्यों?
मामला तब और गंभीर हो गया जब उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे सिर्फ मजदूरों का गुस्सा नहीं, बल्कि “साजिश” बताया।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस हिंसा के पीछे कोई बाहरी ताकत या पाकिस्तान से जुड़ा नेटवर्क सक्रिय था।
पुलिस का कहना है कि कुछ “बाहरी लोग” शांत प्रदर्शन के बाद आए और माहौल भड़काने की कोशिश की।
सवाल बड़ा है…
क्या यह सिर्फ मजदूरों का गुस्सा था?
या फिर इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश छिपी है?
फिलहाल, नोएडा में हालात काबू में हैं, लेकिन इस घटना ने मजदूर असंतोष, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा—तीनों पर एक साथ सवाल खड़े कर दिए हैं।
