850 सीटों का प्लान या सियासी चाल? महिला आरक्षण बिल पर छिड़ी नई बहस

– लोकसभा सीटों को 543 से 850 करने के प्रस्ताव ने बदला सियासी समीकरण, विपक्ष ने उठाए सवाल

– परिसीमन प्रक्रिया को लेकर बढ़ी चिंता, दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर छिड़ी बहस

नई दिल्ली, गौरव शुक्ला

महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सरकार ने भले ही ऐतिहासिक कदम उठाया हो, लेकिन इसके साथ जुड़ा परिसीमन (Delimitation) और सीट बढ़ाने का प्लान अब सियासी तूफान खड़ा कर रहा है। संसद के विशेष सत्र में पेश किए गए तीन बड़े विधेयकों ने राजनीति का पूरा गणित ही बदल दिया है।

दरअसल, सरकार लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने की तैयारी में है, ताकि महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जा सके बिना मौजूदा प्रतिनिधित्व घटाए।

लेकिन यहीं से शुरू हो गया असली खेल—
विपक्ष सवाल उठा रहा है कि क्या यह सिर्फ महिला सशक्तिकरण है या इसके पीछे बड़ा चुनावी गणित छिपा है?

संसद में जोरदार बहस के दौरान सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए। सरकार इसे “ऐतिहासिक सुधार” बता रही है, जबकि विपक्ष इसे “राजनीतिक रणनीति” करार दे रहा है।

सबसे बड़ा विवाद परिसीमन को लेकर है। यह प्रक्रिया देश के चुनावी नक्शे को बदल देगी और जनसंख्या के आधार पर सीटों का बंटवारा तय करेगी।
 विपक्ष को डर है कि इससे कुछ राज्यों, खासकर दक्षिण भारत, के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।

वहीं सरकार का दावा है कि सीट बढ़ाने से सभी राज्यों का प्रतिनिधित्व संतुलित रहेगा और महिलाओं को पर्याप्त जगह मिल सकेगी।

इस पूरे मुद्दे ने संसद के भीतर ही नहीं, बल्कि देशभर में एक बड़ी बहस छेड़ दी है—
क्या यह महिलाओं के अधिकारों की जीत है या फिर सियासत का नया ‘नंबर गेम’?

 

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